100+ Best Desh bhakti shayari in Hindi | देश भक्ति शायरी हिंदी में ।

Desh bhakti shayari in Hindi दोस्तों देश के आजादी का जश्न मनाया जा रहा है और बात Desh bhakti की न  हो ये  हो ही नहीं सकता और देश भक्ति शायरी हिंदी में का जिक्र न हो ये कैसे हो सकता है, हम वीर शहीदों के बलिदानों को कैसे भुला सकते हैं जिन्होंने भारत देश की आजादी के लिए अपने बलिदानों की आहुति बिना किसी शर्त के दे दी।

दोस्तों  आज उन्हें याद करने का दिन है उनके बलिदानों से कुछ सीखने का दिन है, तो आइये मिलकर हम सब इस मौके पर Desh bhakti shayari in Hindi, Desh bhakti shayari, Desh bhakti Images in hindi और देशभक्ति शायरी इन हिंदी  के अनसुने शब्दों के कल्पनाओं का आनंद लेते हैं और अपने वीर शहीदों को याद कर नमन करते हैं।

Best Desh bhakti shayari in Hindi

Deshb hakti shayari in hindi

बलिदानों की ज्वाला जलाए रखना,
लहराता तिरंगा यूं ही उठाये रखना
जान जाए तो जाये कोई गम नहीं
देश पर कुर्बानियों  का मातम न कर
मौत के बाद भी खुद को मुस्कराए रखना।

न झुकने देना कभी इसके मान को,
न मिटने देना कभी इसकी शान को।
चाहे कुर्बान करनी पड़े जान को।।
अपने सीने से इसको लगाए रखना
ये तिरंगा यूं ही उठाये रखना।

इन रंगों में बलिदानों का रंग तुम्हे मिल जायेगा,
ओढ़ तिरंगा निकलोगे तो अहसास तुम्हे हो जाएगा।
कितनो ने इसके खातिर खुद को सूली चढ़ा दिया,
इतिहास के पन्नो में पढने को मिल जायेगा ।।

अब है तुम्हारा फर्ज इसे आगे लेकर जाना है,
इस झंडे को दुश्मन की छाती पर फहराना है।।
राज तिलक और भगत गुरु ने लहू से अपने सींचा है,
तब जाके हरा-भरा अपना आज बगीचा है ।।

Desh bhakti shayari in Hindi veeron ke liye

झुकने न दूंगा तेरे अभिमान को । चाहे दावं पे लगानी पड़े जान को ।। 1

मर मिटेंगे हम अपने वतन के लिए ,
जान कुर्बान है प्यारे चमन के लिए
हमसे हमारी अब हसरत न पूछो
बाँध रखा सर पे तिरंगा कफ़न के लिए ।।

 

ये जोश कभी कम नहीं होगा,
वीरों के बलिदानों से आया है।
कितनो ने लहू बहाया है,
तब जा के तिरंगा पाया है ।।

देशभक्ति शायरी

desh bhakti shayari in hindi

है जान जब तक मेरे सीने में हमारी ,
वतन की शान को न मिटने देंगे।
हम वीर सपूत हैं हम बलिदानी हैं
अपने इस चमन को लहू से सीच देंगे ।

चाहे जान की बाजी लगा देंगे हम
दुश्मनों को वतन से मिटा देंगे हम
है कसम इस तिरंगे की वतन के लिए
ये तिरंगा उनके सीने पर लहरा देंगे हम।

desh bhakti shayari in hindi

कतरा-कतरा मेरे लहू का
इस वतन के काम आएगा
मेरे जाने के बाद भी तिरंगा
हिमालय पर ऐसे मुस्कराएगा।

Desh bhakti shayari 2 line

इस बार हिमालय की चोटी से
जाके इसको लहराना है,
इसके खातिर जाँ भी दे देंगे
ये हम सबने ठाना है।

Desh bhakti shayari 2 line

सौ जन्मो तक उनके अहसानों को भुला नहीं सकते।
हम सर कटा सकते हैं लेकिन झुका नहीं सकते
खींच दी हैं लकीरें जो अपने जिगर के लहू से
तुम लाख कोशिस करलो इसे मिटा नहीं सकते।

हर बरस शहीदों की चिताओं की लौ जलेगी ।
ये वो आग है जो दुश्मन की जान लेगी ।।

Desh bhakti shayari 2 line

जो फूल था  कभी अब अंगारा हो गया ।
ये दुश्मन तेरे खातिर गर्म लहू हमारा हो गया है ।।

हम बलिदानों के आदी है,
उस हिन्द के फौलाद हैं।
जिस माटी में थे जन्मे भगत सिंह,
हम उस माटी के औलाद हैं ।।

Desh bhakti shayari 2 line

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Shayari desh Bhakti

 

सींच दू खून से अगर इस चमन  के काम आए
काश मेरा लहू भी मेरे वतन के काम आए
न जाने कौनसी घडी आख़री हो हमारी,
ये तन मन धन फिर वतन के कामाआए ।

Shayari desh Bhakti

बलिदानों के खातिर हमने खुद को पाला है
यही तमन्ना गूँज रही है जबसे होश संभाला है
है वतन हमारा दिल में बसता इसकी शान निराली है
आंच नं कोई क्या आयेगी जब हम जैसा रखवाला है ।

है बसंती चमन, इसका नीला गगन
इसकी छटा भी निराली है
हम हैं पहरेदार इसी के
करनी हमें रखवाली है ।।

Shayari desh Bhakti

हिमालय से उंचा रहे सर इसका हमने दिल में ठाना है
रंग दो बसंती चोला मेरा हमको सरहद पर जाना है ।
कोई नजर न इसकी और उठे ऐसे पहरेदारी हो
दुश्मन की छाती पर तिरंगा फिर से लहराना है ।।

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Shayari desh Bhakti

जाँ से प्यार वतन है हमारा
हम तो इसके पहरेदार रहेंगे
सौ जनम भी लुटा दें इसके लिए
तब भी हम इसके कर्जदार रहेंगे।

दिल को छू जाने वाली देशभक्ति शायरी

मेरा लहू काफी है इस चमन के लिए
हम जाँ भी लुटा दें वतन के लिए
दिल अगर रखते है दोतों के लिए
तो  खंजर भी रखते है दुश्मन के लिए ।।

हम पहरेदार है इसके हम इसके रखवाले है
प्यारे वतन के खातिर हम जाँ भी लुटाने वाले हैं
इसकी  हमको हर एक बात निराली लगती है
सौ जीवन कुर्बान हैं इसपर  हम ऐसे मतवाले हैं।

हम इस चमन में लहू का रंग भर देंगे
इसके आँगन में खुशिया-2 ही कर देंगे
इसके वाश्ते अपनी जाँ भी लुटा जायेंगे
मुस्कराके खुद को कुर्बान कर देंगे ।।

मेरे रगो का लहू जो तेरे काम आये
काश ऐसा मै कोई काम कर जाता
तेरे शान को यूं ही बनाये रखने के लिए
जंग-ए-मैदान में फिर से उतर जाता।

दुनिया में महकता हुआ चमन चाहता हूँ
शान्ति उन्नति से भरा गगन चाहता हूँ
जान जाए इसके खातिर कोई गम नहीं
बाद मरने के बस तिरंगा कफ़न चाहता हूँ।

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